देवियां

तुम उको कमजोर कहत हो 

पर तुमौ भूलत रहे कि उ खुदै दुर्गा रही ।

तुम उको अलक्समी कहत हो

पर तुमौ  भुलत रहे कि उ खुदै लक्समी रही ।

तुम उको अज्ञानी कहत हो

पर तुमौ भूलत रहे कि उ खुदै सरस्वती रही ।

तुम उको किसी और के संग देखत अपबि‌‌‍‍त्र कहत हो

पर तुमौ भूलत रहे कि उ खुदै सीता रही ।

तुम उको परभु की आराधना में लीन देखत बावरी कहत हो

पर तुमौ भूलत रहे कि उ खुदै राधा रही ।

तुम उको सांत देख उको बेबस कहत हो

पर तुमौ भूलत रहे कि उ खुदै काली जैसन संगहार करत रही 

काहे कहत हो की उका कौनो अस्तित्ब नाहीं है

पर उ तो खुदै इस सरीस्टी का निरमाण करत है।

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